Mathajee Pithajee Aur Gurujee

BHUMI H. KHANDWANI - VII

          माता जी, पिता जी और गुरु जी
फूल कितना भी सुंदर हो,
तारीफ़ खुशबू से ही होती है I
इंसान कितना भी बड़ा हो,
कद्र उसके गुणों से होती है I
कौन ज़्यादा सुखी है,
“सोने की चैन वाला
           या
चैन से सोने वाला” I
 2 जी, 3 जी और 4 जी आ गए हैं ,
भविष्य में 5 जी, 6 जी
और न जाने कितने जी आएँगे ,
पर सबसे बड़े जी तो –
‘माता जी’, ‘पिता जी’ और ‘गुरु जी’ हैं I
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